Arjun ki Chaal (अर्जुन की छाल)

Dr. Abhishek

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Arjun ki Chaal

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Introduction of Arjun  (अर्जुन का परिचय )

( Arjun ki Chaal ) आयुर्वेद में सदाबहार वृक्ष अर्जुन को सिर्फ औषधि के रूप में इस्तेमाल किया गया है. अर्जून की छाल और रस को दवा के रूप में खाया जाता है. अर्जुन नामक बहुगुणी सदाहरित पेड़ की छाल का उपयोग हृदय संबंधी बीमारियों, टीबी और आम कान दर्द, सूजन और बुखार के इलाज में किया जाता है.

अब आप जानते हैं कि अर्जुन जड़ी बूटी कितना गुणकारी है, लेकिन ये किन बीमारियों में फायदेमंद है? अर्जुन छाल का क्षीरपाक कैसे बनाया जाता है?

What is Arjuna in Hindi? ( अर्जुन क्या है? )

पेड़ का नाम “अर्जुन” सिर्फ सफेद रंग के कारण दिया गया है. संस्कृत में “अर्जुन” शब्द का अर्थ सफेद या शुद्ध होता है. इस पेड़ को पांडवकुमार अर्जुन से कोई विशेष संबंध नहीं दिखाई देता. संस्कृत नामों में इस पेड़ को पार्थ, धनंजय आदि पर्यायवाची नाम दिए गए हैं, वे केवल वैद्यक काव्य अर्जुन में शब्दार्थ बोधक शब्द की योजना बनाने के लिए दिए गए हैं और उनका कोई खास अर्थ नहीं मालूम होता.

अर्जुन प्रकृति से शीतल, हृदय के लिए अच्छा और कसैला है; छोटे-छोटे कटने-छिलने पर विष, रक्त संबंधी रोग, मेद या मोटापा, प्रमेह या डायबिटीज, व्रण या अल्सर, कफ और पित्त कम होते हैं. अर्जुन हृदय की मांसपेशियों को बल देता है और उसके पास अच्छी पोषण-क्रिया है. जब मांसपेशियों को बल मिलता है, तो हृदय की धड़कन सही और सबल होती है. इससे हृदय सशक्त और उत्तेजित होता है, क्योंकि सूक्ष्म रक्तवाहिनियों (artery) का संकोच होता है. इससे रक्त वाहिनियों से रक्त का स्राव भी कम होता है, जो सूजन को कम करता है.

अर्जुन छाल के लाभ हृदय को स्वस्थ रखने के लिए

अर्जुन की छाल (Arjun ki Chaal) हृदय रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन इसका सही प्रयोग करने के लिए आपको सही जानकारी चाहिए:

  • एक चम्मच अर्जुन की छाल का चूर्ण एक गिलास टमाटर के रस में मिलाकर नियमित रूप से खाने से हृदय की सामान्य धड़कन 72 से 150 तक रहने लगे तो शीघ्र लाभ मिलता है.
  • रोज सुबह-शाम एक चम्मच बारीक अर्जुन छाल का चूर्ण मलाई रहित एक कप दूध के साथ लेने से हृदय के सभी रोगों में लाभ मिलता है, हृदय को बल मिलता है और कमजोरी दूर होती है. इससे हृदय की अधिक धड़कन आम है.
  • 50 ग्राम गेहूँ के आटे को 20 ग्राम गाय के घी में भून लें. गुलाबी होने पर 3 ग्राम अर्जुन की छाल का चूर्ण, 40 ग्राम मिश्री और 100 मिली खौलता हुआ जल मिलाकर पकाएं. जब हलुवा तैयार हो जाए तब भोजन करें. नियमित रूप से इसका सेवन करने से हृदय की पीड़ा, घबराहट, धड़कन आदि विकारों में राहत मिलती है.
  • 6-10 ग्राम अर्जुन छाल चूर्ण को 200 मिली दूध के साथ पकाकर छानकर पिलाने से हृद्शोथ दूर होता है.
  • 50 मिली अर्जुन छाल रस,(Arjun ki Chaal)  (यदि गीली छाल नहीं मिली तो 50 ग्राम सूखी छाल लेकर चार ली जल में पकाएं) 50 ग्राम गोघृत और 50 ग्राम अर्जुन छाल कल्क में दुग्धादि द्रव को मिलाकर, जब चौथाई शेष रह जाए तो क्वाथ को छान लें. फिर मन्द अग्नि पर पका लें. शेष घृत को ठंडा कर छान लें. अब 75 ग्राम मिश्री और 50 ग्राम शहद को मिलाकर एक कांच या चीनी मिट्टी के पात्र में रखें. रोज सुबह पांच ग्राम गोदुग्ध के साथ इस घी को लें. इसका सेवन हृदय को बल देता है और हृद्विकारों को कम करता है.
  • अर्जुन की छाल के कपड़छन चूर्ण हृदय रोगों पर इन्जेक्शन से भी अधिक प्रभावी होता है. जीभ पर रखकर चूसने से बीमारी कम होने लगती है. यह सारबिट्रेट गोली के स्थान पर उतना ही फायदेमंद था. नाड़ी को रोगी की जीभ पर रखने से नाड़ी की गति बहुत कमजोर होने लगती है. यह दवा किसी भी हानि नहीं पहुंचाती, और यह स्थायी लाभ देती है. यह एलोपैथिक में डिजीटेलिस से भी बेहतर है. यह उच्च रक्तचाप के लिए भी अच्छा है. उच्च रक्तचाप के कारण हृदय में सूजन या शोथ भी दूर करता है.

Name of  Arjuna in Different Languages ( अन्य भाषाओं में अर्जुन के नाम )

अर्जुन का वानास्पतिक नाम Terminalia arjuna (Roxb. ex DC.) W. & A. (टर्मिनेलिया अर्जुन) और Syn-Pentaptera arjuna (Roxb. ex DC.) है. अर्जुन को कॉम्ब्रेटेसी (कॉम्ब्रेटेसी) कुल में Arjuna myrobalan (अर्जुन मायरोबलान) कहा जाता है. भारत भर में अर्जुन कई नामों से जाना जाता है.

संस्कृत में अर्जुन का अर्थ है नदीसर्ज, वीरवृक्ष, वीर, धनंजय, कौंतेय, पार्थ: धवल.

Hindi-अर्जुन, काहू, कोह, अरजान, अंजनी, मट्टी और होलेमट्ट;

नेपाली काहू (Kaahu);

पंजाबी-अरजन (Arjan);

Marathi-अंजन, सावीमदात;

वेल्लामरुटु (Malayalam)

Odia-ओर्जुनो;

Urdu-Arjan;

Assamese-Orjun;

Konkani-Holematti;

Kannada-मड्डी, बिल्लीमड्डी, निरमथी और होलेमट्टी;

गुजरात का अर्थ है अर्जुन, सादादो (Sadado) और अर्जुनसदारा (Arjunsadara).

Tamil-Marudu, Attumarutu, Nirmarudu, and Vellai-Marudu are the names of the region.

Telegu-तैललामद्दि, इरमअददी, येरमददी;

Bengali-अर्जुन गाछ, अरझान;

English: White murdah;

Arbi-अर्जुन पोस्त.

Arjun ki Chaal
Arjun ki Chaal

अर्जुन(Arjun ki Chaal) के उपयोग और लाभ 

आयुर्वेद में अर्जुन के पेड़ के फल और छाल को औषध के रूप में उपयोग किया जाता है. अर्जुन की छाल में पोटाशियम, मैग्निशियम, कैल्शियम और टैनिन सबसे अधिक फायदेमंद हैं.

कान दर्द में अर्जुन वृक्ष के लाभ

कान में 3-4 बूँद अर्जुन के पत्ते का रस लगाने से कान दर्द कम होता है.

अर्जुन मुखपाक से राहत दिलाता है (Arjuna Helps for Stomatitis in Hindi)

अर्जुन मूल चूर्ण को तिल तैल या मीठा तैल में मिलाकर मुँह पर लेप करें. इसके बाद गुनगुने पानी से चेहरा धोने से फायदा होता है.

अर्जुन, पेट की गैस ऊपर आने में मदद करता है (Burping in Hindi).

अर्जुन की छाल के लाभ भी एसिडिटी से राहत देते हैं. अर्जुन की छाल के लाभों का पूरा लाभ उठाने के लिए इसका पूर्ण उपयोग कैसे करें, यह जानना महत्वपूर्ण है.

10 से 20 मिली अर्जुन छाल के काढ़े को नियमित रूप से पीने से उदावर्त्त या पेट की गैस ऊपर आती है, जो एसिडिटी को कम करता है.

अर्जुन चाल मूत्राघात में फायदेमंद है

मूत्राघात के सबसे आम लक्षणों में से एक है मूत्र करते समय दर्द या जलन होना. अर्जुन छाल का काढ़ा 20 मिलीग्राम पिलाने से मूत्राघात में लाभ मिलता है.

रक्तप्रदर (अत्यधिक रक्तस्राव) में फायदेमंद अर्जुन

महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान अधिक मात्रा में रक्त स्राव होना रक्तप्रद कहते हैं. ठीक से प्रयोग करने पर अर्जुन छाल के लाभ अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में बहुत मदद करते हैं. इसके लिए एक कप दूध में एक चम्मच अर्जुन छाल चूर्ण को उबालकर पकाएं; आधा रहने पर थोड़ी मात्रा में मिश्री मिलाकर दिन में तीन बार खाना चाहिए. इसे खाने से रक्तप्रदर को फायदा होता है.

हड्डी जोड़ने में अर्जुन चला लाभकारी

अर्जुन छाल (Arjun ki Chaal) बहुत फायदेमंद है अगर हड्डी टूट गई है या कमजोर हो गई है. अर्जुन छाल का उपयोग करने से हड्डी का दर्द कम होता है और हड्डी जुड़ने में भी मदद मिलती है.

  • कुछ हफ्ते तक एक चम्मच अर्जुन छाल चूर्ण को दिन में तीन बार एक कप दूध के साथ खाने से हड्डी मजबूत होती है. टूटी हुई हड्डी या भग्न अस्थि के स्थान पर इसकी छाल को घी में पीसकर लेप करें. इससे हड्डी शीघ्र जुड़ जाएगी.
  • 20 से 40 मिली क्षीरपाक में 5 ग्राम घी और मिश्री मिलाकर पीने से अस्थि भंग (टूटी हड्डी) में लाभ मिलता है.
  • अर्जुन (Arjun ki Chaal) की लाक्षा और त्वचा को समान मात्रा में मिलाकर पीसकर चूर्ण बनाने के लिए मिलाएं. गुग्गुलु को 2-4 ग्राम घी में मिलाकर खाने या भोजन में घी और दूध का प्रयोग करने से शीघ्र भग्न संधान होता है.
  • थोड़ी मात्रा में 1-2 ग्राम हड़जोड़, लाक्षा, गेहूँ और अर्जुन का पेस्ट या चूर्ण में घी मिलाकर दूध के साथ पीने से अस्थिभग्न और जोड़ों से हड्डियों के छुट जाने में लाभ होता है.
  • अर्जुन का चूर्ण, कुष्ठ को ठीक करने के लिए

अर्जुन, क्षयरोग या टीबी में फायदेमंद

अर्जुन का औषधीय (Arjun ki Chaal)  गुण तपेदिक या क्षय रोग के लक्षणों को कम करता है. अर्जुन की त्वचा का 2-4 ग्राम नागबला और केवाँच बीज चूर्ण मधु, घी और मिश्री से मिलाकर दूध में पीने से क्षय और खांसी रोगों से जल्दी राहत मिलती है.

अर्जुन का उपयोगी हिस्सा

आयुर्वेद में अर्जुन की छाल( Arjun ki Chaal), जड़, पत्ता तथा फल को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है.

अर्जुन का इस्तेमाल कैसे करें

अर्जुन का सेवन और इस्तेमाल बीमारी के लिए पहले ही बताया गया है. यदि आप किसी विशिष्ट बीमारी का इलाज करने के लिए अर्जुन का उपयोग कर रहे हैं तो आपको अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए.

डॉक्टर की सलाह के अनुसार-

आप 2-4 ग्राम अर्जुन के चूर्ण, 20-40 मिली पत्ते का काढ़ा या 5-10 मिली अर्जुन का रस खा सकते हैं.

अर्जुन का चूर्ण, कुष्ठ को ठीक करने के लिए

एक चम्मच अर्जुन छाल  (Arjun ki Chaal) के चूर्ण को दूध या जल के साथ खाने से या इसकी छाल को जल में घिसकर त्वचा पर लगाने से कुष्ठ और व्रण में लाभ मिलता है. अर्जुन छाल का काढ़ा बनाकर पीना भी कुष्ठ में फायदेमंद है.

अर्जुन की छाल (Arjuna Chal Heals Ulcer)

अल्सर या चोट—जब अल्सर का घाव सूखने में देर लगती है या दूसरा घाव आसपास निकलता है, तो अर्जुन खाना बहुत फायदेमंद होता है. अल्सर के घावों को धोने के लिए अर्जुन छाल को पीसकर काढ़ा बनाना फायदेमंद है.

अर्जुन की छाल (Arjuna Tree to Treat Pimples)

आज के प्रदूषित माहौल में मुँहासे से कौन नहीं परेशान है! लेकिन अर्जुन की छाल(Arjun ki Chaal) मुँहासों को दूर करने के साथ-साथ चेहरे की चमक भी बढ़ा देगी. अर्जुन की छाल का चूर्ण मधु में मिलाकर मुँहासों और व्यंगों पर लेप करने से फायदा मिलता है.

अर्जुन, रक्तातिसार या पेचिश से राहत दिलाता है.

5 ग्राम अर्जुन छाल चूर्ण  (Arjun ki Chaal) को 250 मिली गोदुग्ध और लगभग समभाग पानी के साथ मंद आंच पर पकाएं. जब दूध शेष रह जाए तब उतारकर उसे सुखाकर 10 ग्राम मिश्री या शक्कर मिलाकर प्रतिदिन सुबह पीने से हृदय रोग दूर होता है. यह पेय रक्तपित्त, जीर्ण ज्वर और रक्तपित्त में भी फायदेमंद है.

विभिन्न पत्तियों (जैसे अर्जुन, बेल, जामुन, मृणाली, कृष्णा, श्रीपर्णी, मेहंदी और धाय) के स्वरस को घृत, लवण और अम्ल में मिलाकर खडयूषो बनाएं. ये खडयूष सब परम् संग्राहिक हैं.

अर्जुन चाल डायबिटीज को नियंत्रित करने के लाभ

नीलकमल, आमलकी, नीम, हल्दी और अर्जुन की छाल(Arjun ki Chaal)  को पानी में पकाकर शेष काढ़ा बनाएं. 10 से 20 मिली काढ़े में मधु मिलाकर हर सुबह पीने से पित्तज-प्रमेह में लाभ होता है

अर्जुन की छाल के शुक्रमेह में लाभ

पुरुष शुक्रमेह बीमार होते हैं. इस बीमारी में सिमेन बहुत अधिक निकलता है. इस तरह से अर्जुन की छाल (Arjun ki Chaal)को खाने से शुक्रमेह को दूर किया जा सकता है. नियमित रूप से सुबह-शाम 10-20 मिली काढ़ा अर्जुन की छाल या सफेद चंदन से पीने से शुक्रमेह में लाभ होता है

सूजन के इलाज में अर्जुन का उपयोग

अर्जुन की छाल  (Arjun ki Chaal) की चाय या काढ़ा पीने से सूजन कम होता है. (यह गुर्दों पर प्रभाव डालता है, जो अधिक मूत्र उत्पादन करता है). अर्जुन को हृदय रोगों के अलावा शरीर के कई अंगों में पानी पड़ने और सूजन होने पर भी प्रयोग किया जा सकता है.)

-अर्जुन की जड़ के छाल के चूर्ण और गंगेरन की जड़ के छाल के चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में मिलाकर हर सुबह शाम दूध के साथ लेने से दर्द और सूजन कम होते हैं.

रक्तपित्त (कान-नाक से खून बहना) में फायदेमंद अर्जुन (Arjuna Chal Beneficial Haemoptysis या Raktpitta in Hindi)

अगर रक्तपित्त की समस्या से ग्रस्त हैं तो अर्जुन का सेवन करने से जल्दी आराम मिलेगा। 2 चम्मच अर्जुन छाल (Arjun ki Chaal) को रात भर जल में भिगोकर रखें, सबेरे उसको मसल-छानकर या उसको उबालकर काढ़ा बनाकर या अर्जुन की छाल की चाय की तरह से पीने से रक्तपित्त में लाभ होता है।

बुखार में फायदेमंद अर्जुन

अगर कोई बुखार मौसम बदलने या संक्रमण से हुआ है, तो अर्जुन उसे राहत देने में बहुत मदद करता है.

अर्जुन की छाल की चाय या काढ़ा 20 मिलीग्राम पिलाने से बुखार ठीक होता है.
1 चम्मच गुड़ के साथ अर्जुन छाल चूर्ण खाने से बुखार कम होता है.
2 ग्राम अर्जुन छाल के चूर्ण में समान मात्रा में चंदन मिलाकर, शर्करा-युक्त तण्डुलोदक (चीनी और चावल से बना लड्डू) के साथ खाने से रक्तपित्त में लाभ होता है. अर्जुन छाल से बना हिम, काढ़ा, पेस्ट या रस भी खाने से लाभ होता है.

 

क्षीरपाक अर्जुन छाल कैसे बनाया जाता है? How to Prepare Arjun Chal Khirpak?)

ताजा अर्जुन की छाल (Arjun ki Chaal)  को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रखें. 250 मिली पानी को 250 मिली दूध में मिलाकर हल्की आंच पर रखें. फिर तीन ग्राम अर्जुन छाल का चूर्ण मिलाकर उबालें. जब उबलते-उबलते पानी सूखकर आधा दूध रह जाए, तो उतार दें. पीने योग्य होने पर छान लें और खा लें. इससे हृदय रोग की संभावना कम होती है और दिल का दौरा होने से बचाव होता है.

अर्जुन कहां मिलता है? (Arjuna कहां खोजा गया या विकसित हुआ?)

नदियों और नालों के किनारे 18 से 25 मीटर तक ऊँचे पंक्तिबद्ध हरे पल्लवों के वल्कल ओढ़े अर्जुन के वृक्ष(Arjun ki Chaal)  दिखते हैं, जैसे महाभारत के पार्थ (महारथी अर्जुन) की तरह बहुत से महारथी अक्षय तरकशों में बैठे हैं और महासमर में बहुत से व्याधिरूपी शत्रुओं को मार डालने के लिए एकत्र हो गए हैं. अर्जुन का वृक्ष वन में मिलता है.

 

ध्यान दें: इस लेख का उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है और यह चिकित्सा सलाह की जगह नहीं ले सकता। पहले अपने चिकित्सक से परामर्श लें और उनके दिए गए निर्देशों का पालन करें।

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